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शुरू करने से पहले मशहूर लेखक हरिवंशराय राय बच्चन के कुछ चुनिदा पंक्तियों को दोहराना चाहूंगा. हम जिस खिलाड़ी की बात कर रहे हैं, उनपर ये पंक्तियाँ एकदम सटीक बैठती है.

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।

आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

आज ये बात साबित हो गई कि इंसान के हिम्मत और हौंसलों से बढ़कर कुछ नहीं होता है. अगर आपको खुद पर विश्वास हो, तो दुनिया आपसे उम्मीद नहीं छोड़ती. आज बात भारत के एक ऐसे तेज गेंदबाज की, जिसके आत्मविश्वास के आगे चयनकर्ताओं को झुकना पड़ा. हम बात कर रहे हैं टीम इंडिया के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट के बारे में.

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तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट 12 साल बाद भारत की टेस्ट टीम में वापसी कर रहे हैं. ये वही जयदेव उनादकट हैं, जिन्होंने जनवरी में एक भावुक ट्वीट किया था और वापसी की इक्षा जाहिर की थी. उन्होंने अपने ट्वीट में रेड बॉल क्रिकेट में एक मौका दिए जाने की बात कही थी. जयदेव उनादकट ने रेड बॉल एक एक फोटो शेयर करते हुए लिखा था, “डिअर रेड बॉल, कृपया मुझे एक और मौका दें… मैं आपको गर्व महसूस करवाऊंगा, वादा है!”

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आपको बता दें कि जयदेव उनादकट को बांग्लादेश दौरे पर खेली जाने वाली 2 मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड में शामिल किया गया है. यानी 12 साल के लंबे ब्रेक के बाद जयदेव की भारतीय टेस्ट टीम में वापसी हो रही है. जयदेव ने 16 दिसंबर, 2010 को दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध अपना पहला टेस्ट मैच खेला था, और यही उनका आखिरी टेस्ट अंतराष्ट्रीय भी था. उस मैच में भारतीय टीम को एक पारी और 25 रनों से हार का सामना करना पड़ा था और जयदेव विकेटलेस रहे थे. उस मैच में जयदेव उस भारतीय टीम का हिस्सा थे, जिसमें क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, दीवार राहुल द्रविड़ थे, मुल्तान के सुल्तान वीरेंदर सहवाग थे, दिग्गज तेज गेंदबाज जहीर खान थे. 1 दशक बीत गए, इस दौरान जयदेव का 1 टेस्ट 2 नहीं हो पाया. लेकिन अब ऐसा होता दिख रहा है.

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आपको बता दें कि जयदेव उनादकट की ऐसे ही टेस्ट टीम में वापसी नहीं हुई है बल्कि इसके पीछे जयदेव का बेहतरीन प्रदर्शन है. आपको बता दें कि जयदेव उनादकट घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र के कप्तान हैं और उनकी कप्तानी में अभी हाल ही में टीम ने महाराष्ट्र को हराकर विजय हजारे ट्रॉफी पर कब्जा किया है. जयदेव ने पूरे टूर्नामेंट में ना सिर्फ जबरदस्त गेंदबाजी की बल्कि अपनी बेहतरीन नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया.

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बाएं हाथ के पेसर ने भारतीय टीम में चुने जाने पर एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, “ओके, यह असली जैसा दिखता है ! यह उन सभी के लिए है जो मुझपर विश्वास करते रहे हैं और मेरा समर्थन करते रहे हैं. मैं आभारी हूं.” सचमुच जयदेव उनादकट की वापसी की कहानी किसी सपने से कम नहीं लगता. क्योंकि 12 साल का लंबा इंतजार करना ही बड़ी बात है लेकिन जयदेव ने इस दौरान घरेलु क्रिकेट में खेलना जारी रखा और खुद पर विश्वास रखा. इसी का नतीजा है कि वो भारत के लिए 12 साल बाद टेस्ट क्रिकेट खेलेंगे और उन्हें मौका मिलने की पूरी संभावना है. आपको जयदेव उनादकट में कितना दम-ख़म दिखता है ? कमेंट में हमें जरुर बताएं.

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