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क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसके चाहने वाले अनेक है। लोगों को सबसे ज्यादा मजा तेज तर्रार बल्लेबाजी देखने में आता है। पहले क्रिकेट के खेल को धीमा खेल और कई दिनो तक चलने वाला माना जाता था। लेकिन अब या पूरी तरह बदल चुका है आईपीएल और टी 20 फॉर्मेट के आने के बाद से इनकी दीवानगी में गजब का उछाल देखने को मिला है। क्रिकेट का सबसे नया फॉर्मेट इंग्लैंड में द 100 के नाम से खेला जा रहा है इसमें प्रति टीम केवल 100 गेंदे ही मिलती है जो खिलडियों को अति आक्रामक होने के लिए मजबूर करती है। वहीं यूएई में हर साल टी 10 लीग का आयोजन भी कराया जाता है। लेकिन कुछ खिलाड़ी टेस्ट और वनडे मैच को भी टी 20 की तरह खेलते थे। टी 20 फॉर्मेट के ना होने से पहले भी उनके खेलने का तारीक टी 20 की ही तरह था। हम आज आपको ऐसे ही कुछ खिलाड़ियों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हे बस एक ही तरीके से खेलना आता था वह चाहे पहले रन पर हो या 99 पर, उन्हें सिर्फ एक चीज़ पता थी कि गेंद को बॉउंड्री तक पहुँचाना है।

  • विवियन रिचर्ड्स

वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने विश्व के गेंदबाजों की एक न चलने दी है. कहते हैं उनकी बल्लेबाजी इतनी आक्रामक हुआ करती थी कि गेंदबाजों के रातों की निंद उड़ जाती थी. टेस्ट मैच जिसे ठहर कर खेलने वाला गेम कहा जाता है. उस मैच में भी रिचर्ड्स गेंदबाजों को नहीं छोड़ते थे. इस दौरान उनका टेस्ट स्ट्राइक रेट 86.07 का रहा है. टेस्ट मैच में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 8540 रन बनाए हैं. उनका हाई स्कोर 291 रन का रहा है. टेस्ट मैच में उन्होंने कुल 24 शतक और 45 अर्धशतक लगाए हैं. टेस्ट मैच में उन्होंने 1 हजार 45 चौके और 84 छक्के लगाए हैं.

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  • विरेंद्र सहवागभारत

भारतीय टीम के सबसे हरफनमौला खिलाड़ियों की सूची में दूसरा नाम वीरेंद्र सहवाग का ही आता था। “मुल्तान के सुलतान” के नाम से मशहूर सहवाग ने कई बार सुलतानों वाला काम किया है। महान गेंदबाज ब्रेट ली में एक बार कहा था मुझे सबसे ज्यादा तकलीफ वीरेंद्र सहवाग ही देते है। सहवाग गेंदबाज के नाम को नहीं बल्कि उनकी गेंदों को खेलता था। अगर गेंद उनके पाले में है तो वह बाउंड्री के बाहर ही दिखनी चाहिए। सहवाग हमेशा ही हैंड आई कॉर्डिनेशन वाले खिलाड़ी रहे थे। उनका तकनीक इतना बेहतरीन नहीं था मगर टाइमिंग, खेल की समझ और बेबाक अंदाज उन्हें दूसरों से अलग बनाता था। जबसे उन्हें सौरव गांगुली ने ओपनिंग बल्लेबाजी की जिम्मेदारी सौंपी थी. तबसे उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वीरेंद्र सहवाग ने क्रिकेट के हर एक फॉर्मेट में तेज़ और स्पिनर दोनों प्रकार के गेंदबाज़ों की बराबर धुनाई की। अगर सहवाग के रिकॉर्ड की बात करे तो टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 104 मैचों की 180 परियों में 49.34 की औसत और 82.23 के शानदार स्ट्राइक रेट से 8586 रन बनाये हैं. वही टेस्ट में उनके नाम 23 शतक, 6 दोहरे शतक सहित2 तिहरे शतक हैं. टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाने वाले वह एक मात्र बल्लेबाज है. उनकी टेस्ट मैच को भी टी-20 के अंदाज में खेलने की ताकत अद्भुत थी।

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  • क्रिस गेल – वेस्ट इंडीज

क्रिस गेल किसी परिचय के मोहताज नहीं है। भारत में तो उनके खूब चाहने वाले है। भारत में बहुचर्चित कपिल शर्मा शो में भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। गेल के हाहाकार से दुनिया जगत के बॉलर्स के पसीने छूट जाते थे। वह एक लंबे कद के खिलाड़ी है वह स्पिन और फास्ट दोनों तरह के गेंदबाजों को लंबे लंबे छक्के लगाने में माहिर है। उनकी बैटलिफ्ट लंबी होने के कारण वह आसानी से लंबे छक्के लगा सकते है. वह चौकों से ज्यादा छक्के मारने में विश्वास रखते है। गेल की आक्रमकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की इन्होने टेस्ट मैच की पहली ही गेंद में  छक्का लगाया था. गेल के नाम टेस्ट मैच में तेहरा शतक दर्ज हैं. उन्होंने 333 रनों की पारी खेली थी और इसी के बाद से वे इसी नंबर की जर्सी भी पहने लगे थे। उनके क्रिकेटिंग करियर के रिकॉर्ड की बात करे तो टेस्ट क्रिकेट में 103 मैचों की 182 परियों में गेल के नाम 7214 रन दर्ज हैं। वही 15 शतक, 3 दोहरे शतक, एक तिहरा शतक भी शामिल है। गेल को सिर्फ एक अंदाज में बल्लेबाजी करने आता था वह केवल ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के लिए ही बने है उन्हे फर्क नहीं बढ़ता की वह टेस्ट मैच खेल रहे है या टी 20, उनके खेलने का अंदाज हमेशा आक्रामक ही रहता था।

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  • एडम गिलक्रिस्ट – ऑस्ट्रेलिया

एडम गिलक्रिस्ट एक ऐसा बल्लेबाज जिसका बड़े मैचों में चलना लगभग तय रहता था उनके पास कबलियत के साथ खेल को अपने आक्रामक शॉट्स से अपनी टीम की तरफ मोड़ना आता था। गिलक्रिस्ट का कैफ ऐसा थी कि पहली गेंद से ही फील्डर बाउंड्री लाइन पर होते थे। उनके लिए टेस्ट ही टी 20 होता था। उन्हे इससे कोई मदलब नहीं थी कि वह टेस्ट खेल रहे है या टी 20. गेंदबाज की आंख में आंख डालना और गेंद को बाउंडर के बाहर दे मरना उनको बस यही तरीका आता था। गिलक्रिस्ट खेल के एक ही घंटे में पासा पलट दिया करते थे। वह कब कौनसा शॉट खेलेंगे या किसी को नहीं पता होता था। केवल 57 गेंदों पर शतक लगाने वाले गिलक्रिस्ट के नाम टेस्ट मैच में तीसरा सबसे तेज शतक है। विश्व में ऐसे खिलाड़ी काफी कम देखने को मिलते है जो दबाव की स्थिति में भी निखर के आए और अपनी टीम को जीत दिला दे। गिलक्रिस्ट टेस्ट मैच में 100 छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। बात करे उनके टेस्ट कैरियर की तो उन्होंने 96 मैचों की 137 पारी में 47.61 के औसद से 5570 रन बनाए है। इस बीच उनका स्ट्राइक रेट 81.96 का रहा है।

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  • शाहिद अफरिदीपाकिस्तान

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी विश्व क्रिकेट में एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में जाने जाते हैं. उनके सामने गेंदबाजों को इस बात का भी भरोसा नहीं होता है कि वह जो गेंद डाल रहे हैं उसे शाहिद किस तरह का सम्मान देंगे. अपने बल्ले से हमेशा रन बनाने के लिए शाहिद अफरिदी जाने जाते हैं. शाहिद अफरीदी ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए 27 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उनका हाई स्कोर 156 है जबकि उनका स्ट्राइक रेट 87 का है. इस दौरान उन्होंने 1716 रन भी बनाया है तो वहीं 5 शतक उनके बल्ले से निकला है जबकि 8 अर्धशतक लगाए हैं वहीं अगर हम छक्के चौकों की बात करें तो उनके बल्ले से 220 चौके और 52 छक्के लगे हैं. शहिद अफरिदी की बल्लेबाजी हमेशा आक्रामक रही है. चाहे वे टेस्ट मैच खेल रहे हों या फिर वनडे या फिर टी-20 हर मैच में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी हमें देखने को मिली है. इसीलिए तो कहा जाता है कि शाहिद अफरिदी टेस्ट मैच को भी एक टी-20 मैच की तरह खेलते थे. उनका स्ट्राइक रेट बताता है कि यह बल्लेबाज गेंदबाजों की धुनाई किस तरह से करता था.

  • ब्रैंडन मैक्कुलम – न्यूजीलैंड

न्यूजीलैंड के हरफनमौला खिलाड़ी ब्रेंडम मैक्कुलम की भारत में भी धाकड़ फैन फॉलोइंग है। पिछले साल तक वह कोलकाता नाइट राइडर्स के कोच के रूप में कार्यरथ थे। आईपीएल के पहले मैच में ही 158 रनों की पारी खेल मैक्कुलम ने अपनी काबिलियत का मुरीद बच्चे से लेकर बूढ़े तक को बना लिया था। वह कुछ चुनिंदा बल्लेबाजों में से एक है जो तेज गेंदबाज को भी स्पिनर की तरह आगे निकल कर सामने की तरफ छक्का मारा करते थे। उनके स्टेप आउट करके तेज गेंदबाजों को छक्के मारने की कला एक दम अद्भुत थी उनके बाद तेज गेंदबाजी और स्पिन दोनों को एक सामना खेलने की क्षमता थी। वह केवल सामने ही बड़े शॉट नहीं लगते थे बल्कि वह एक 360° प्लेयर थे। वह 150+ की रफ्तार गेंदबाज को लेट कर स्कूप शॉट लगाते थे जो एक मजबूत जिगर वाला बल्लेबाज ही कर सकता है। वही टेस्ट क्रिकेट में उनके पास सबसे तेज 54 गेंदों में सेंचुरी जड़ने का रिकॉर्ड है वह टेस्ट क्रिकेट में 107 छक्के भी लगा चुके है। वह प्रेशर क्या होता है ये जानते ही भी थे बस अपनी ही धुन में गेंदबाजों कूट हुए, टीम को जीत दिला देते थे।

  • सनथ जयसूर्या – श्रीलंका

सही मायने में कैसी ने पावर हिटिंग की शुरुआत की थी तो वह सनथ जयसूर्या ही थे। उन्होंने अपने समय से 20 साल पहले का क्रिकेट खेला और और अपने कट और फ्लिक शॉट से दर्शकों का दिल।जीत लिया। श्रीलंका के लिए ओपनिंग बल्लेबाजी करने वाले जयसूर्या आती ही आक्रामक रवैया अपना आते थे। उनके समय में जब कोच बल्लेबाजों को पिच पर टिकने और उसका मिजाज समझने की सलाह देते थे उस समय जयसूर्या पिच पर जाते ही गेंदबाजों को कूटने के तरीके खोजने में लगे रहते थे। आगे वाली गेंद आई तो डाउन द ग्राउंड शॉट खेल दिया। शॉट बाल आई तो कट या पुल पर बाउंड्री बटोर ली। एकदिवसीय मैचों में 50 से भी काम गेंदों में शतक लगाने का रिकॉर्ड उनके नाम था। इसके बाद सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड 19 साल तक उनके नाम रहा है। वह टेस्ट मैच को भी टी 20 की तरह ही खेलते और केवल शतक नहीं दोहरे शतक लगाने में माहिर थे। जयसूर्या के 22 साल लंबे करियर मे कई कीर्तिमान रचे वह गेंदबाजी में भी शानदार थे जब भी टीम को पार्टनरशिप तोड़नी होती थी वह टीम को जरूर विकेट दिलाते थे। उन्होंने 110 टेस्ट मैचों की 188 परियों में 10683 रन बनाए।

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