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18 2 1कुछ ही दिनों में छठ महापर्व त्योहार की शुरुआत होने वाली है. यह एक ऐसा त्योहार है जो बिहारियों के लिए काफी ख़ास माना जाता है. बिहार में कोई ही एक ऐसा परिवार होगा जहां छठ पर्व को लोग न मनाते होंगे. ऐसे तो हमारे बिहार में हर तरह के पर्व को बड़े धूमधाम से मनाते है लेकिन जब बात छठ की आती है तो यहां के लोगों के मन में एल अलग आस्था देखने को मिलती है जो श्हयद ही किसी और पर्व के लिए दिखाई देता हो. आप छठ पर्व के महत्व का बिहारियों के जीवन में इस बात से अंदाजा लगा सकते है कि देश से बाहर रहने वाले बिहारी भी पूरे रीतीरिवाज के साथ छठ पर्व को मनाते हैं. इस व्रत को करने के दौरान कई बातों का ध्यान रखना होता. लोगों का मानना है कि इस व्रत को पूरी शुद्धता के साथ करना चाहिए. यह एक ऐसा पर्व है जिसमें मूर्ति पूजा शामिल नहीं है लेकिन फिर भी आज के समय में कुछ लोग ऐसे होते है जो मूर्ति की स्थापना करते हैं और उनकी पूजा करते हैं. इस व्रत में छठी मैया की पूजा की जाती है . आपको बता दे कि इस पर्व को कठिन व्रतों में से एक माना जाता हैं.19 1इस पूजा की शुरुआत नहायखाय से होती है . इस दिन व्रत करने वाले महिला या पुरुष स्नान कर के केवल एक समय का भोजन करते है और अपने मन को शुद्ध रखते है. इस दिन घर में शुद्धता का बहुत ध्यान रखा जाता है, वहीं जो भी चीजें खाने के लिए बनाई जाती है उनमें लहसुन और प्याज की मात्रा बिलकुल नहीं होती हैं. इस दिन व्रतियों के लिए चने की दाल, चावल, और लौकी की सब्जी बनाई जाती है और वो भी पूरी शुद्धता का ध्यान रखते हुए.20 1 2छठ पूजा का दूसरा दिन खरना के नाम से जाना जाता है. इस दिन प्रस्साद के रूप में गुड़ का खीर बनाया जाता है . जिसे कहा कर व्रत करने वाला इंसान अपने दिन भर के उपवास को खोलता है और फिर वह प्रसाद सभी लोगों में बांट दिया जाता है. खरना के इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रती को एक दिन और दो रात निर्जला उपवास करना होता है. इस दिन प्रसाद को मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी पर बनाये जाने की प्रथा हैं. बता दे कि खरना के प्रसाद को तब ही शुभ माना जाता है जब इसे मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी पर बनाया जाये.22 3 1खरना के अगले दिन शाम के समय डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है. इस दिन व्रत करने वाले रात का रखा मिश्री और पानी पिते है. शाम के अर्ध्य के दिन विशेष प्रकार का ठेकुआ और मौसमी फल को सूर्य देव के सामने चढ़ाया जाता है और उन्हें दूध और जल से अर्ध्य दिया जाता है. अगली सुबह यानी की पर्व के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है. इसके बाद व्रती घर के देवीदेवता की पूजा करते है और फिर प्रसाद खा कर व्रत की समाप्ति करते हैं.

 

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि छठ पूजा में बनाई गयी किसी भी चीजों को बहोत ही शुद्धता से बनाया जाता है. लोगों का मानना है कि इस पूजा के दौरान कोई भी काम असुद्धता के साथ किया जाता है तो, पूजा का फल नहीं मिल पाता. छठ करने के लिए कई ऐसे लोग होते है जो गंगा किनारे जाते है वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते है जो अपने घरों में ही छोटा गड्ढा का निर्माण कर उसमें पानी डाल कर पूजा करते हैं . इस पर्व को व्रती परिवार की सुख शान्ति और उन पर अपनी कृपा बनाये रखने की प्रार्थना करते हैं.

 

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