Patna News: जब भी पटना का नाम आता है, तो हमारे सामने बिहार की राजधानी की तस्वीर उभरती है। गंगा किनारे बसा एक ऐतिहासिक शहर, व्यस्त सड़कें, पुरानी विरासत और आधुनिकता की ओर बढ़ता बिहार। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत से हजारों किलोमीटर दूर स्कॉटलैंड में भी एक जगह का नाम पटना है?
जी हां, यह कोई संयोग या कहानी नहीं, बल्कि इतिहास से जुड़ी एक दिलचस्प हकीकत है। स्कॉटलैंड का पटना बिहार के पटना की तरह बड़ा शहर नहीं, बल्कि एक छोटा और शांत गांव है। यहां की हरियाली, पहाड़ियां और शांत वातावरण बिहार की राजधानी से बिल्कुल अलग नजर आता है। इसके बावजूद दोनों जगहों को जोड़ने वाली सबसे खास कड़ी है—‘पटना’ नाम।
स्कॉटलैंड में कैसे बसा ‘पटना’?
स्कॉटलैंड के इस गांव का इतिहास करीब ढाई सौ साल पुराना बताया जाता है। इसकी कहानी विलियम फुलर्टन नाम के एक ब्रिटिश व्यक्ति से जुड़ी है। फुलर्टन परिवार का भारत और खासतौर पर बिहार के पटना से पुराना संबंध था।
विलियम फुलर्टन का बचपन भारत में बीता था। उनके पिता जॉन फुलर्टन ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े हुए थे। भारत में रहते हुए विलियम ने पटना और आसपास के इलाके को करीब से देखा। यही वजह थी कि बिहार की राजधानी उनके जीवन और यादों का हिस्सा बन गई।
बाद में विलियम फुलर्टन स्कॉटलैंड लौट गए। वहां उन्होंने कारोबार शुरू किया और दून नदी के आसपास के इलाके में खनन गतिविधियों से जुड़े। उस समय इस क्षेत्र में कोयले और चूना पत्थर की खदानें महत्वपूर्ण थीं।
खनन उद्योग के विस्तार के साथ यहां काम करने वाले मजदूरों के लिए घर बनाए गए। धीरे–धीरे इन घरों के आसपास एक बस्ती विकसित होने लगी। जब इस नई बस्ती का नाम रखने की बारी आई, तो विलियम फुलर्टन ने अपने बचपन और भारत से जुड़ी यादों को याद किया।
उन्होंने इस बस्ती का नाम बिहार के पटना शहर के नाम पर ‘Patna’ रख दिया।
यानी स्कॉटलैंड का पटना महज नाम की समानता नहीं है। इसके पीछे भारत में बिताए गए एक ब्रिटिश परिवार के जीवन और बिहार से जुड़े उनके व्यक्तिगत संबंध की कहानी है।
बिहार के पटना और स्कॉटलैंड के पटना में क्या समानता है?
दोनों पटना भले ही आकार और आबादी में एक–दूसरे से बिल्कुल अलग हों, लेकिन इनके बीच एक दिलचस्प समानता है। बिहार का पटना गंगा नदी के किनारे बसा है, जबकि स्कॉटलैंड का पटना दून नदी के किनारे स्थित है।
स्कॉटलैंड का पटना ग्लास्गो से करीब 72 किलोमीटर दूर स्थित है। यह इलाका हरे–भरे वातावरण और शांत जीवन के लिए जाना जाता है। वहीं बिहार का पटना एक बड़ा और तेजी से विकसित हो रहा शहर है।
स्कॉटलैंड के पटना का विकास कभी खनन उद्योग के साथ तेजी से हुआ था। यहां मजदूरों के लिए घरों के साथ स्कूल और दूसरी सुविधाएं भी विकसित की गईं। हालांकि, समय के साथ खनन उद्योग कमजोर हुआ और इसका असर गांव पर भी पड़ा।
खनन उद्योग बंद हुआ तो बदल गया गांव
स्कॉटलैंड में कोयला खनन के धीरे–धीरे खत्म होने के बाद पटना की गतिविधियां भी कम होती गईं। यहां का रेलवे स्टेशन भी 1964 में बंद कर दिया गया। रोजगार के अवसर घटने के साथ कई लोग दूसरे इलाकों की ओर चले गए।
फिर भी इस छोटे से गांव ने अपनी पहचान और इतिहास को नहीं भुलाया। आज भी यहां के लोगों के बीच यह कहानी मौजूद है कि उनके गांव का नाम भारत के पटना शहर से जुड़ा हुआ है।
गांव में स्कूल, चर्च, यूथ ग्रुप और गोल्फ क्लब जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। Patna Day जैसे आयोजनों के जरिए गांव के इतिहास और विलियम फुलर्टन से जुड़ी कहानी को भी याद किया जाता है।
सात समंदर पार आज भी जिंदा है पटना का नाम
बिहार का पटना सिर्फ एक शहर का नाम नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति से जुड़ी एक पहचान है। दिलचस्प बात यह है कि इसी नाम की पहचान भारत से हजारों किलोमीटर दूर स्कॉटलैंड के एक छोटे से गांव तक पहुंची।
विलियम फुलर्टन के बचपन की यादों ने एक नई बस्ती को ऐसा नाम दिया, जो आज भी भारत और स्कॉटलैंड के बीच इतिहास की एक अनोखी कड़ी के रूप में देखा जाता है।
तो अगली बार जब आप बिहार के पटना का नाम सुनें, तो यह जरूर याद रखिएगा कि सात समंदर पार स्कॉटलैंड में भी एक छोटा–सा पटना मौजूद है।
एक पटना गंगा किनारे बसा है और दूसरा दून नदी के किनारे—लेकिन दोनों को जोड़ता है एक नाम और उससे जुड़ी करीब ढाई सौ साल पुरानी कहानी।
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