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Patna news: पटना की बेली रोड शहर की उन सड़कों में शामिल है, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। कहीं गाड़ियों का शोर, कहीं ट्रैफिक की हलचल और कहीं तेजी से बदलती शहर की तस्वीर। आधुनिक पटना की रफ्तार को बेली रोड पर साफ महसूस किया जा सकता है। लेकिन इसी भागदौड़ के बीच एक ऐसी जगह भी मौजूद है, जहां पहुंचते ही शहर की रफ्तार के बीच इतिहास और आस्था की झलक दिखाई देती है। यह जगह है खाजपुरा शिव मंदिर।

बेली रोड से गुजरते हुए आपने भी शायद इस मंदिर को देखा होगा। सड़क के बीचों–बीच अपनी अलग पहचान बनाए यह शिवालय आज आसपास की ऊंची इमारतों, दुकानों और व्यस्त ट्रैफिक के बीच नजर आता है। हालांकि, इसकी कहानी आज के आधुनिक पटना से कहीं ज्यादा पुरानी है। बताया जाता है कि इस मंदिर के शिवालय की प्राण–प्रतिष्ठा वर्ष 1886 में हुई थी। यानी करीब 140 साल से यह स्थान भगवान शिव के भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

बदलते पटना के बीच कायम रहा मंदिर

kqजब इस शिवालय की स्थापना हुई थी, उस समय पटना आज जैसा विकसित और विस्तृत शहर नहीं था। बेली रोड और उसके आसपास का इलाका भी वर्तमान स्वरूप से काफी अलग रहा होगा। समय के साथ पटना का विस्तार हुआ, सड़कें चौड़ी हुईं, बाजार और बड़ी इमारतें विकसित हुईं और बेली रोड शहर की प्रमुख सड़कों में शामिल हो गया। लेकिन इन बदलावों के बीच खाजपुरा शिव मंदिर अपनी जगह पर कायम रहा।

यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पटना के बदलते स्वरूप का एक जीवंत गवाह भी माना जाता है। आधुनिक शहर के बीच खड़ा यह पुराना शिवालय लोगों को उस दौर की याद दिलाता है, जब पटना का विस्तार आज की तरह नहीं हुआ था।

‘मनोकामना शिवालय’ के नाम से भी पहचान

खाजपुरा शिव मंदिर से जुड़ी श्रद्धालुओं की आस्था भी काफी गहरी है। भक्तों के बीच इसे ‘मनोकामना शिवालय’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। इसी विश्वास के कारण सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

समय के साथ मंदिर परिसर का भी विस्तार किया गया। मंदिर के ऊपरी हिस्से का निर्माण 1992 में कराया गया, जहां भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती विराजमान हैं। इसके बाद 2009 में राम दरबार का निर्माण भी कराया गया। इस तरह पुराने शिवालय के साथ मंदिर परिसर में समय-समय पर नए धार्मिक स्वरूप भी जुड़ते गए।

हिंदू–मुस्लिम एकता की भी मिसाल

खाजपुरा शिव मंदिर की खासियत केवल इसकी पुरानी उम्र और धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। यह इलाका सामाजिक सौहार्द और हिंदू–मुस्लिम एकता की मिसाल के तौर पर भी देखा जाता है। मंदिर के आसपास मस्जिद भी मौजूद है और लंबे समय से यहां अलग-अलग समुदायों के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं।

एक तरफ मंदिर की घंटियों की आवाज सुनाई देती है, तो दूसरी तरफ आसपास की सामाजिक जिंदगी में विभिन्न धर्मों के लोग साथ नजर आते हैं। यही मेल–जोल इस जगह को पटना की दूसरी ऐतिहासिक धार्मिक जगहों से अलग पहचान देता है।

महाशिवरात्रि पर बदल जाता है पूरा माहौल

महाशिवरात्रि के दौरान खाजपुरा शिव मंदिर का नजारा पूरी तरह बदल जाता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगने लगती है। भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूजा–अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं के लिए भोलेनाथ का आशीर्वाद मांगते हैं।

रात में शिव विवाह, महामृत्युंजय मंत्र और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंचने की बात कही जाती है। कई मौकों पर यह संख्या 10 से 15 हजार तक पहुंचने का अनुमान भी लगाया जाता है।

आधुनिक पटना के बीच इतिहास की पहचान

आज जब बेली रोड पर हर समय ट्रैफिक और शहर की तेज रफ्तार दिखाई देती है, उसी सड़क के बीच खड़ा यह मंदिर करीब 1886 से जुड़ी आस्था की कहानी सुनाता है। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि बदलते पटना की विरासत का हिस्सा है।

पटना लगातार आधुनिक हो रहा है। नई इमारतें बन रही हैं, सड़कें बदल रही हैं और शहर का विस्तार लगातार जारी है। लेकिन खाजपुरा शिव मंदिर इस बात की याद दिलाता है कि विकास की रफ्तार के बीच भी शहर की पुरानी पहचान और धार्मिक विरासत को बचाए रखना संभव है।

इसलिए अगली बार जब आप बेली रोड से गुजरें और सड़क के बीच खड़े इस मंदिर पर नजर पड़े, तो इसे महज एक पुराना शिव मंदिर समझकर आगे न बढ़ें। इसके पीछे 1886 से चली आ रही आस्था, बदलते पटना की कहानी और सामाजिक सौहार्द की एक लंबी विरासत छिपी हुई है। शायद यही वजह है कि पटना की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल बेली रोड के बीच खड़ा यह पुराना शिवालय आज भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है।

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