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बिहार कि सियासत में इन दिनों एक नया मुद्दा रोज निकलकर सामने आ रहा है. दरअसल यह सबकुछ 2024 और 2025 के चुनाव को देखते हुए बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. हालांकि इन सब के बीच में इन दिनों एक बात है जो लोग बड़े ही चाव के साथ सुनना पंसद कर रहे हैं और वह हैं बिहार में AIMIM की एंट्री. क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने कांग्रेस राजद और जदयू को झटका देते हुए 5 सीटों पर अपनी जीत तय की थी हालांकि बाद के समय में उनके चार विधायक राजद के साथ चले गए ऐसे में अब जब AIMIM प्रमुख ओवैसी का बिहार दौरा हुआ तो लोग यही कह रहे हैं कि क्या बिहार में एक बार फिर से ओवौसी फैक्टर काम करेगा. बिहार के साथ ही पूरे देश में मुसलमानों के वोट बैंक को साधने के लिए बीजेपी ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है. दरअसल बीजेपी अब पासमांदा मुसलमानों को लेकर साफ्ट हो गई है. और इधर बिहार में जदयू ने भी मुसलमानों को लेकर एक नया राग छेड़ दिया है ऐसे में अब बिहार की सियासत में जाति धर्म को लेकर जितने दरवाजे खुलने थे धीरे धीरे करके सब खुल रहे हैं और आने वाले समय में इन सब का असर दिखने लगेगा.

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सबसे पहले बात करते हैं जदयू की तरफ से मुसलामानों को लेकर दिए गए उस बयान को लेकर, दरअसल पिछले दिनों बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी भीम चौपाल के तहत बिहारशरीफ में थे जहां उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश में रहने वाले मुसलमान लंदन और अमेरिका से नहीं आए हैं. उन्होने कहा कि भारत के रहने वाले सभी मुसलमान इसी देश के हैं, जो पहले दलित हुआ करते थे लेकिन ब्राह्मणवादी व्यवस्था की वजह से उन्होंने या तो इस्लाम धर्म अपना लिया या फिर बुद्धिस्ट हो गए. उन्होंने कहा कि भारत के 90 प्रतिशत मुसलमान कन्वर्टेड हैं. भारत में रहने वाला मुसलमान अफगानिस्तान से नहीं आया है. अशोक चौधरी ने कहा कि इसलिए मुसलमानों को सुरक्षित रखना हमारा फर्ज है.

अशोक चौधरी के इस बयान के एक से दो दिन पहले बिहार सरकार ने मुसलमानों को रमजान के मौके पर सरकारी दफ्तर में एक घंटे की देरी से आने और एक घंटा पहले जाने की सहूलियत प्रदान की गई थी. ऐसे में बीजपी नीतीश कुमार पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है. एक तरफ जहां अशोक चौधरी भारत के मुसलमानों को हिंदू कनवर्टेंड बता रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार उन्हें मुसलमान मान कर रमजान के दौरान सरकारी ऑफिस में छुट्टी की बात कह रहे हैं.

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हालांकि अब अशोक चौधरी के इस बयान के कई मायने मतलब निकाले जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि अशोक चौधरी जब कांग्रेस के साथ थे तब भी और आज जब जदयू के साथ हैं तब भी वे नपी तुली बयान देने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन अब जब उनका बयान सामने आया है तो यह कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ न कुछ बदलाव देखने को मिलेगा. क्योंकि अशोक चौधरी चब कांग्रेस से जदयू में आए थे तो एक नी थ्योरी दलित और मुस्लिम की दी थी जिसका फायदा जदयू को लंबे समय तक मिलता रहा. ऐसे में अब एक बार फिर से जदयू उसी फॉर्मूलें को मजबूती के साथ आगे बढ़ाना चाहती है. इसका परिणाम हैं कि अशोक चौधरी यह कहते हैं कि ब्राह्मणवादी नीतियों के कारण दलितों ने मुस्लिम धर्म को अपना लिया है. और आज देश के 90 प्रतिशत मुसलमान कनवर्टेंड बाले हैं. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि अशोक चौधरी अमुमन बहुत बहुत कम बोलते हैं लेकिन जिस तरह से उनका बयान सामने आया है उससे यही लगता है कि जदयू कोई बड़़ी योजना पर काम कर रही है.

खैर बीजेपी ने भी पूरे देश में पासमांदा मुसलमानों को लेकर एक नया राग छेड़ दिया है ऐसे में यह कहा जा रहा है कि बीजेपी भी मुसलमानों को अपने वोट बैंक का हिस्सा बनाना चाहती है. इधर बिहार कि सियासत में AIMIM की एंट्री यह जदयू की नई थ्योरी के लिए कितना नुकसान देह होगा यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगी फिलहार सभी राजनीतिक पार्टियां मुसलमानों को रिझाने में लगी हुई है.

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